Women Reservation Bill 2023

2009,2023

27 सालो से महिला आरक्षण बिल अटका आ रहा है इस बीच मोदी सरकार ने लोकसभा मे महिला आरक्षण बिल 2023 जिसे नारी शक्ति वंदन विधेयक कहा गया ,पेश किया ।।यह 128वां संविधान संशोधन विधेयक है जिसके पास होने पर लोकसभा व विधानसभा मे महिलाओं के लिए 33% सीट आरक्षित होगी ,हालांकि यह आरक्षण जातिगत नही होगा।।यह आरक्षण 15वर्षों के लिए होगा।।हालांकि नये परिसीमन के कारण यह 2029 से पहले लागू नही होगा।।

ऐसा नही है कि यह प्रयास पहली बार हो रहा है पहले की भी सरकारों ने ऐसी कोशिश की है लेकिन विरोध की वजह से यह पारित नही हो पाया ,आइए देखते हैं इसके लिए अब तक के प्रयास

 

इतिहास::-

1996 को एचडी देवगौड़ा की सरकार ने 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में ससंद में महिला आरक्षण विधेयक को पेश किया था. उस समय यूनाइटेड फ्रंट की सरकार थी, जो 13 पार्टियों का गठबंधन था. लेकिन सरकार में शामिल जनता दल और अन्य कुछेक पार्टियों के नेता महिला आरक्षण के पक्ष में नहीं थे. इस विरोध की वजह से इस विधेयक को सीपीआई की गीता मुखर्जी की अगुवाई वाली संयुक्त समिति के समक्ष भेजा गया.  महिला आरक्षण विधेयक के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलेगा कि 27 सालों की यह यात्रा इतनी आसान नहीं रही

1997 में लोकसभा में एक बार फिर महिला आरक्षण विधेयक को लाया गया लेकिन  गठबंधन के भीतर ही इसके विरोध में आवाजें उठने लगी. इस दौरान विधेयक पर बहस करते हुए शरद यादव ने  कहा था कि इस बिल से सिर्फ पर-कटी औरतों का ही फायदा पहुंचेगा. परकटी शहरी महिलाएं हमारी ग्रामीण महिलाओं का प्रतिनिधित्व कैसे करेंगी. उनके इस बयान से विवाद खड़ा हो गया था. हिंदी भाषी क्षेत्र के नेताओं ने इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया था.इस वजह से यूनाइटेड फ्रंट सरकार इस बिल को पास नहीं कर पाई थी और यह औंधे मुंह गिर गया था.

साल 1998 से 2004 के बीच बीजेपी की अगुवाई में एनडीए सरकार ने कई बार महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने की कोशिश की.1998 को लोकसभा में  एम थंबी दुरई ने इस विधेयक को सदन के पटल पर पेश करने की कोशिश की लेकिन राष्ट्रीय जनता दल  और समाजवादी पार्टी के सांसदों ने इसका पुरजोर विरोध किया. इस हंगामे के बीच आरजेडी के सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव ने लोकसभा के स्पीकर जी एम सी बालयोगी से बिल की कॉपी छीन ली और उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए.

 

 कानून मंत्री राम जेठमलानी ने  1999 को इस बिल को पेश किया. लेकिन इस बार फिर सपा, बसपा और आरजेडी ने इसका विरोध किया. इसके बाद 2000, 2002 और 2003 में भी विधेयक को पारित कराने की कोशिशें की गईं लेकिन कांग्रेस, लेफ्ट के समर्थन के बावजूद यह पारित नहीं हो सका. 

 मई 2008 को  यूपीए सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को राज्यसभा में पेश किया. लेकिन इसे जल्द ही कानून और न्याय की स्थाई समिति के समक्ष भेज दिया गया.. 25 फरवरी 2010 को केंद्रीय कैबिनेट ने महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी दे दी.।। मार्च 2010 को राज्यसभा में इस विधेयक को भारी मतों से पारित किया गया. लेकिन यह विधेयक लोकसभा में पेश नहीं हो पाया.

 

 बीजेपी ने 2014 और 2019 के चुनावी घोषणापत्रों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का वादा किया था ।। 18 सितंबर 2023 को कैबिनेट की अहम बैठक में महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दे दी गई.अब इसे महिला शक्ति वंदन विधेयक के नाम से पेश किया गया है ।।

 क्यों है जरूरी::::-- अधिकतर विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 15 फीसदी से कम है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 19 विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी 10 फीसदी से भी कम है. मौजूदा लोकसभा में 543 सदस्यों में से महिलाओं की संख्या 78 है, जो 15 फीसदी से भी कम है. राज्यसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगभग 14 फीसदी है. कई विधानसभाओं में महिलाओं की भीगीदारी 10 फीसदी से कम है.

महिलाओं के आरक्षण से राजनीति मे महिलाओं की भूमिका बढ़ेगी,नियम कानून बनाने मे महिलाओं का पक्ष भी सुना जाएगा,इससे महिला सशक्तिकरण होगा और महिलाओं की स्थिति मे सुधार होगा।।

 

विदेशों मे भी है प्रावधान:::- पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में महिलाओं के लिए 60 सीटें आरक्षित हैं. बांग्लादेश की संसद में महिलाओं के लिए 50 सीटें आरक्षित हैं. नेपाल की संसद में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित हैं.

UAE की फेडरल नेशनल काउंसिल  में महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित हैं. इंडोनेशिया में उम्मीदवारों में कम से कम 30 फीसदी महिलाओं का प्रतिनिधित्व होना चाहिए. कई अफ्रीकी, यूरोपीय, दक्षिण अमेरिकी देशों में भी राजनीति में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है.

Imp Facts 

1 ये विधानपरिषद व राज्यसभा पर लागू नही है

2.ये 15 साल के लिए है इसे आगे फिर से बढ़ाने के लिए बिल लाना होगा

3.इसमे Sc,St ,obc आरक्षण अलग से नही है

4. इसमे सदन का दो तिहाई समर्थन व राज्यों की सहमति आवश्यक है।।

Punished by DeshRaj Agrawal 

09:39 am | Admin


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