छग का प्रसिद्ध स्थल तातापानी

1410,2023

छग अपनी प्राकृतिक सुंदरता व आश्चर्यों के लिए जाना जाता है ऐसा ही एक स्थल है बलरामपुर मे स्थित तातापानी(Tatapani)।।ताता का यहां अर्थ है गर्म ।।यह स्थल   बलरामपुर जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित है तातापानी  प्राकृतिक रूप से निकलते गरम पानी के लिए प्रदेशभर में प्रसिद्ध है।

यहां के कुण्डों व झरनों में धरातल से बारह माह गरम पानी प्रवाह करता रहता है।  ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री राम ने खेल खेल में सीता जी की और पथ्थर फेका जो की सीता मां के हाथ में रखे गरम तेल के कटोरे से जा टकराया। गरम तेल छलक कर धरती पर गिरा एवं जहां जहां तेल की बूंदें पडी वहां से गरम पानी धरती से फूटकर निकलने लगा। स्थानीय लोग यहां की धरती पवित्र मानते हैं एवं कहा जाता है कि यहां गरम पानी से स्नान करने से सभी चरम रोग खत्म हो जाते हैं। इस अद्भुत दृश्य को देखने एवं गरम पानी का मजा लेने प्रदेशभर से लोग यहां आते हैं।यहां गर्म पानी के कारण लोग चावल ,आलु उबालते थे हालांकि अब इसे प्रतिबंधित कर दिया गया है।।

 

यहां के शिव मंदिर  भी प्रसिद्ध है यह  लगभग 400 वर्ष पुरानी मूर्ति स्थपित है  हर वर्ष मकर संक्रान्ति के पर्व पर लाखों की संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। इस दौरान यहां विशाल मेला आयोजित किया जाता है 

एक और मान्यता यह भी है कि भगवान शिव और अन्य देवी देवता जब धरती पर आए तो उन्होंने नहाने के लिए गर्म जल कुंड का निर्माण किया और इसी मान्यता के कारण यहां हर वर्ष मकर संक्रान्ति त्यौहार में मेला लगता है तब लाखों की संख्या में लोग आते हैं और मेले के साथ तातापानी के गर्म जल श्रोत का आंनद लेते हैं l

तातापानी में मकर संक्रांति के अवसर पर पिछले 50 से अधिक वर्षों से हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर मेले का आयोजन किया जाता रहा है. बलरामपुर जिले के अस्तित्व में आने के बाद प्रशासन ने तातापानी मेला को महोत्सव का स्वरूप दिया है. वर्षों पुराने तातापानी के मूल स्वरूप को बरकरार रखते हुए कई फीट ऊंची शिव जी की प्रतिमा स्थापित की गई है. इसी के ठीक नीचे 12 ज्योतिर्लिंगों का स्वरूप प्रदर्शित किया गया है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां के जमीन में सल्फर कि मात्रा अत्यधिक है इसी कारण से यहां का पानी गर्म हो जाता है, यहां के पानी में भी सल्फर की गंध आती है।इस स्थल को तपेश्वर धाम के नाम से भी जाना जाता है।।यहाँ एक शिव मंदिर भी जहाँ के मूर्तियाँ 400 वर्ष पुरानी हैं, मंदिर के बाहर भी कई सारे भगवानों की मूर्तियाँ है जो तालाब खुदाई करने के दौरान मिली।

Published by DeshRaj Agrawal 

03:46 am | Admin


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