Cgpsc Needs to ReEvaluate their Working System

1809,2023

छग लोक सेवा आयोग ने अपने उपर लग रहे लगातार आरोपो को देखते हुए  कुछ अच्छे कदम उठाए इस क्रम मे मुख्य परीक्षा की कॉपी को ऑनलाइन अपलोड किया ताकि छात्रों मे संदेह न रहे लेकिन ऐसा करने पर आयोग पर और अधिक प्रश्न हो रहे हैं जिस तरीके से कॉपी चेकिंग की गई इसे देखकर ऐसा लगता है मानो कोई 8वीं का बच्चा कॉपी चेक कर रहा हो

ऐसा भी नही है कि आयोग ने इसके लिए एक ही चेकर रखा हो ,एक से अगर कोई गलती हो गई तो अगले चेकर से वह सही हो सकता है फिर भी इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आई है जिससे आयोग की विश्वसनीयता खतरे मे हैं छात्र मे तैयारी के लिए कोई मोटिवेशन.नही बचा है यदि वे मेहनत कर सही भी लिखते हैं तो भी नंबर नही मिलते और गलत लिखने वालो को नंबर मिल रहे हैं ,कौन चेकर ऐसी कॉपी चेक कर रहा है क्या योग्यता है उनकी,आयोग को अपनी विश्वसनीयता वापस लानी है तो सामने आकर इन सभी प्रश्नों का जवाब देना होगा,अगर आयोग ने अपनी पद्धति मे सुधार नही किया तो छात्रो का भरोसा खत्म हो जाएगा और विरोध.धीरे-धीरे आंदोलन मे बदल सकता है।।

कुछ छात्रों द्वारा वायरल कॉपी पर नजर डालने पर यह स्पष्ट हो जाता है 

◆ जैसे कम्प्यूटर के प्रश्न पर Operating System के प्रश्न पर छात्र द्वारा keyboard ,Mouse ,Printer लिखने पर पूरे नंबर दिए गये ,जबकि स्कूल के बच्चे को.भी ये पता होगा,चलिए मान लीजिए छात्र ने लिख दिया लेकिन क्या चेकर को ये नही दिखा वो.भी एक से अधिक चेकर जो कि आयोग द्वारा चयनित तथाकथित  विषय विशेषज्ञ हैं.।सीजीपीएससी जैसी बड़ी संस्था पर ये बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह है।।

◆एक और सवाल जिसमे पूछा गया है 1857 क्रांति में हनुमान सिंह के योगदान के.बारे मे और अभ्यर्थी ने लिख दिया वीरनारायण सिंह के बारे मे और मजे की बात है कि इसमे भी चेकर ने नंबर दे दिए ।

◆एक और सवाल था अकबर की भू राजस्व व्यवस्था से जुड़ा प्रश्न आइने दहशाला था ,अभ्यर्थी ने इसे मिरर से जोड़ दिया और फिर भी नंबर मिल गये ,अब ऐसी स्थिति मे योग्य छात्र जो दिन रात मेहनत करते हैं उनका क्या ,ये.बहुत बड़ा प्रश्न है जिसका जवाब आयोग को देना होगा।।

इसका एक उपाय ऑब्जेक्टिव पैटर्न हो सकता है लेकिन राज्य के सर्वोच्च सिविल सेवा पद के लिए ये पैटर्न उपयुक्त नही होगा.,साथ ही इसमे धांधली की संभावना बढ़ सकती है और प्रश्न खड़े हो सकते हैं लेकिन आयोग फिर से इस पर फिर से विचार करने की जरूरत है।।

कुल मिलाकर अगर आयोग को भविष्य मे छात्रो के विरोध से बचना है और अपनी विश्वसनीयता वापस लानी है तो इसमे सुधार लाना.होगा।।इस मायने डॉ. प्रदीप जोशी का कार्यकाल सबसे अच्छा रहा है उम्मीद है आयोग को.इस बार कोई अच्छा अध्यक्ष मिलेगा

सीजीपीएससी  मे कुछ सुधार जो किए जा सकते है

(1) प्रारंभिक परीक्षा की डुप्लीकेट ओएमआर सीट की व्यवस्था

(2)प्रारंभिक परीक्षा के लिए चयनित प्रश्व और उ्तर को विषय विशेषज्ञों द्वारा दोबारा चेक किया जाए

(3)विलोपित प्रश्न. 2-3 % से उपर न.हो वैसे विलोपन होना ही नही चाहिए

(4)मुख्य परीक्षा मे उत्तर चेक करने वालो को एक आदर्श. उत्तर दिए जाए जिससे वे चेक कर सकें,अभी ऐसा व्यवस्था है चेकिंग देख के नही लगता

(5)मुख्य परीक्षा चेक करने वालों की योग्यता क्या है इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए

(6)टॉप 10 या टॉप की कॉपी सार्वजनिक की जाए  ताकि अन्य छात्रों को आइडिया मिल सके

 

Published by DeshRaj Agrawal 

05:18 am | Admin


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